ONDC: भारत की डिजिटल कॉमर्स व्यवस्था में क्रांति | पूरी जानकारी

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी पहल है, जो ई-कॉमर्स को पूरी तरह से लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। 2021 में शुरू हुई यह योजना 2022 से पूरी तरह सक्रिय हो गई और अब यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है।

ONDC को अक्सर पेमेंट्स के लिए यूपीआई (UPI) की तरह देखा जाता है, क्योंकि यह बंद प्लेटफॉर्मों के वर्चस्व को तोड़कर एक खुले, इंटरऑपरेबल नेटवर्क का निर्माण कर रही है। यह छोटे व्यवसायों, स्थानीय विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को समान अवसर प्रदान करती है, जिससे डिजिटल कॉमर्स में समावेशिता बढ़ती है।

ONDC कोई एक ऐप या प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह खुले प्रोटोकॉल पर आधारित एक नेटवर्क है जो विभिन्न ऐप्स और प्लेटफॉर्मों को जोड़ता है।

ONDC की शुरुआत और इतिहास

ONDC की नींव 2021 में पड़ी, जब व्यापार और उद्योग संवर्धन विभाग (DPIIT) ने इसे एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में स्थापित किया। इसका मुख्य उद्देश्य ई-कॉमर्स में बड़े प्लेटफॉर्मों के एकाधिकार को चुनौती देना था। भारत में ई-कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन यह कुछ बड़े खिलाड़ियों जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट तक सीमित था, जहां छोटे विक्रेता उच्च कमीशन और सीमित पहुंच से जूझते थे। ONDC ने बेकन प्रोटोकॉल पर आधारित एक ओपन-सोर्स मॉडल अपनाया, जो ट्रांजेक्शन को अनबंडल करता है – अर्थात खोज, ऑर्डर, पेमेंट और डिलीवरी को अलग-अलग रखकर इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करता है।

शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट्स से शुरू होकर, ONDC ने तेजी से विस्तार किया। 2025 तक यह 630 से अधिक शहरों में सक्रिय है, लाखों विक्रेताओं को जोड़ चुकी है और करोड़ों ट्रांजेक्शन प्रोसेस कर रही है। इसका एडवाइजरी काउंसिल में नंदन नीलेकणी जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं, जो इसे मजबूती प्रदान करते हैं। ONDC का मिशन है कि हर कोई ऑनलाइन बेच सके और हर कोई खरीद सके, बिना किसी गेटकीपर के।

ONDC क्या है और कैसे काम करता है?

ONDC कोई सिंगल मार्केटप्लेस नहीं है, बल्कि यह खुले स्पेसिफिकेशंस और प्रोटोकॉल का सेट है। यह बेकन प्रोटोकॉल पर आधारित है, जो डिसेंट्रलाइज्ड डिजिटल कॉमर्स को सपोर्ट करता है। इसमें खरीदार और विक्रेता अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, फिर भी ट्रांजेक्शन सुचारू रूप से होता है। उदाहरण के लिए, पेटीएम ऐप पर खरीदार मीशो या मिस्टोर के विक्रेता से सामान खरीद सकता है।

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मुख्य भागीदार तीन प्रकार के हैं:

-खरीदार नेटवर्क पार्टिसिपेंट्स (Buyer Apps): पेटीएम, फोनपे का पिनकोड, मिस्टोर, मीशो, मैजिकपिन आदि।

-विक्रेता नेटवर्क पार्टिसिपेंट्स (Seller Apps): स्टोरहिप्पो, ईसमुदाय, किको लाइव आदि।

-लॉजिस्टिक्स और गेटवे प्रदाता: डिलीवरी और इंटरकनेक्शन सुनिश्चित करते हैं।

ONDC में जुड़ना आसान है। विक्रेता एक सेलर ऐप के माध्यम से रजिस्टर करते हैं, अपना कैटलॉग डिजिटाइज करते हैं और लाइव हो जाते हैं। खरीदार किसी भी बायर ऐप से पिनकोड या क्यूआर कोड स्कैन कर लोकल विकल्प खोजते हैं। नेटवर्क पारदर्शिता पर जोर देता है – ऑर्डर, पेमेंट और डिलीवरी के लिए मानकीकृत प्रक्रियाएं हैं।

ONDC के मुख्य लाभ

ONDC भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर की कई समस्याओं का समाधान है। इसके लाभ निम्न हैं:

– छोटे विक्रेताओं का सशक्तिकरण: किराना दुकानें, कारीगर, एमएसएमई और महिला उद्यम उच्च कमीशन से मुक्त होकर राष्ट्रव्यापी पहुंच प्राप्त करते हैं।

– उपभोक्ताओं के लिए बेहतर विकल्प: अधिक उत्पाद, प्रतिस्पर्धी कीमतें और हाइपरलोकल खोज।

– समावेशिता और ग्रामीण विकास: ग्रामीण विक्रेता और एफपीओ सीधे बाजार तक पहुंचते हैं।

– नवाचार और प्रतिस्पर्धा: नए ऐप्स और सेवाएं उभरती हैं।

केस स्टडीज

ONDC की सफलता को समझने के लिए कुछ वास्तविक उदाहरण देखें:

– किराना स्टोर्स और छोटे विक्रेता: किको लाइव जैसे प्लेटफॉर्म ने हजारों किराना स्टोर्स को ONDC पर ऑनबोर्ड किया है। 2024-2025 में किको लाइव ने किराना स्टोर्स के लिए लाखों ऑर्डर्स प्रोसेस किए, जिसमें दैनिक ऑर्डर्स 2500 से अधिक पहुंच गए। दिल्ली के एक ऑर्गेनिक ग्रॉसरी स्टोर ने ONDC के माध्यम से बिक्री बढ़ाई और लोकल डिलीवरी में सफलता पाई। 2025 तक 7 लाख से अधिक सेलर्स, मुख्यतः एमएसएमई, ऑनबोर्ड हुए हैं।

– किसान उत्पादक संगठन (FPO): लगभग 5,000 से अधिक FPO ONDC पर रजिस्टर्ड हैं, जो 3,100 से ज्यादा उत्पाद बेच रहे हैं। यह किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच प्रदान करता है, मध्यस्थों को कम करके आय बढ़ाता है। कई FPO ने Rs 10 करोड़ से अधिक की बिक्री हासिल की है।

– मोबिलिटी और फूड डिलीवरी: मोबिलिटी सेक्टर में ONDC का 50% से अधिक हिस्सा है, जिसमें मुंबई मेट्रो टिकटिंग जैसे उदाहरण शामिल हैं। फूड डिलीवरी में Ola और अन्य ऐप्स ने Swiggy-Zomato के मुकाबले सस्ते विकल्प प्रदान किए, जहां एक ही बर्गर ONDC पर 15-20% सस्ता मिलता है।

– वित्तीय सेवाएं: बजाज मार्केट्स ने ONDC से इंटीग्रेट होकर इलेक्ट्रॉनिक्स और एप्लायंसेज बेचना शुरू किया।

ये केस स्टडीज दिखाते हैं कि ONDC छोटे व्यवसायों को कैसे सशक्त बना रही है।

ONDC के सेक्टर और विस्तार

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ने अपने शुरुआती फोकस से आगे बढ़कर अब कई डोमेन में विस्तार कर लिया है। शुरू में किराना और फूड डिलीवरी पर केंद्रित यह नेटवर्क अब रिटेल, मोबिलिटी, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों तक फैल चुका है।

2025 के अंत तक ONDC 630 से अधिक शहरों में सक्रिय है, 3 लाख से ज्यादा विक्रेताओं को जोड़ चुकी है और कुल 326 मिलियन से अधिक ऑर्डर्स प्रोसेस कर चुकी है। यह विस्तार छोटे व्यवसायों, किसानों और स्थानीय विक्रेताओं को डिजिटल बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ONDC के मुख्य सेक्टर और डोमेन निम्न हैं:

रिटेल और ग्रॉसरी: किराना, दैनिक जरूरतों के सामान, जहां हाइपरलोकल डिलीवरी पर जोर है।

फूड एंड बेवरेज: रेस्टोरेंट ऑर्डर्स और डिलीवरी, जहां ONDC ने Swiggy-Zomato जैसे प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा में सस्ते विकल्प प्रदान किए।

फैशन और ब्यूटी: कपड़े, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स (BPC)।

इलेक्ट्रॉनिक्स और एप्लायंसेज: मोबाइल, घरेलू उपकरण।

होम डेकोर और लाइफस्टाइल: फर्नीचर, टॉयज, गेम्स।

हेल्थ एंड वेलनेस: स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद।

मोबिलिटी: राइड बुकिंग, मेट्रो टिकटिंग (जैसे मुंबई मेट्रो), बस और इंटरसिटी ट्रैवल – यह सेक्टर 2025 में 50-56% ट्रांजेक्शंस का हिस्सा बन चुका है।

एग्रीकल्चर और FPO: किसान उत्पादक संगठनों के लिए डायरेक्ट मार्केट, जहां हजारों FPO जुड़े हैं।

फाइनेंशियल सर्विसेज: म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस, क्रेडिट और लोन।

ट्रैवल एंड हॉस्पिटैलिटी: होटल बुकिंग, टूरिज्म सेवाएं।

अन्य: लॉजिस्टिक्स, गेमिंग (इन-गेम शॉपिंग) और उभरते क्षेत्र जैसे हेल्थकेयर।

ये डोमेन Beckn प्रोटोकॉल पर आधारित हैं, जो इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करते हैं। 2025 में मोबिलिटी और नॉन-मोबिलिटी सेक्टरों में तेज विकास देखा गया, जहां नॉन-मोबिलिटी (फूड, ग्रॉसरी, फैशन) में 800% से अधिक ग्रोथ हुई।

चुनौतियां और भविष्य

ONDC को कई चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा है, जैसे उपभोक्ता जागरूकता की कमी, ऐप्स के बीच सुसंगत यूजर एक्सपीरियंस, उत्पाद क्वालिटी में असमानता और बड़े प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा। कुछ रिटेल कैटेगरी में ऑर्डर्स में गिरावट आई है, जबकि इंसेंटिव्स कम होने से कुछ ऐप्स ने पीछे हटने के संकेत दिए हैं। डेटा प्राइवेसी और एल्गोरिदम शेयरिंग भी मुद्दे हैं।

फिर भी, Ondc का भविष्य उज्ज्वल है। मोबिलिटी और कृषि में मजबूत विकास जारी है, साथ ही फाइनेंस और ट्रैवल में नए पार्टनरशिप्स हो रहे हैं। सरकार का फोकस “भारत एक बाजार” की अवधारणा पर है, जहां छोटे व्यापारियों को राष्ट्रव्यापी पहुंच मिलेगी। 2025 के अंत तक ट्रांजेक्शंस में और वृद्धि की उम्मीद है, साथ ही नए डोमेन जैसे गेमिंग और हेल्थ में विस्तार। ONDC लाखों छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाकर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

ONDC भारत के डिजिटल कॉमर्स का भविष्य है – समावेशी, प्रतिस्पर्धी और नवाचारी।


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