वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच “Rich Dad Poor Dad” के मशहूर लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक नई सलाह दी है। उनके मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आने वाले महीनों में बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म कर देगी कि इसका असर अमेरिका से लेकर यूरोप और एशिया तक हर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और 2025 में सबसे सुरक्षित और फायदेमंद निवेश ऊर्जा सेक्टर (Energy Sector) है।
Ai से बेरोजगारी और क्रैश की शुरुआत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेज विकास से दुनियाभर में रोजगार का स्वरूप बदल रहा है और 2025–2030 के बीच लाखों नौकरियां खत्म हो सकती हैं। रिपोर्टों के अनुसार क्वालिटी अस्यूरेन्स, सपोर्ट स्टाफ, क्लर्क, ग्राफिक डिजाइनिंग सबसे अधिक प्रभावित होंगी। विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि अगले पाँच वर्षों में 9.2 करोड़ नौकरियाँ खत्म होंगी, जबकि दूसरी तरफ लगभग 17 करोड़ नई टेक्नोलॉजी-आधारित नौकरियाँ पैदा भी होंगी।
Robert Kiyosak जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि AI से होने वाली बेरोज़गारी आर्थिक बाजार के लिए एक गंभीर खतरा है। यह नौकरियों की कमी, ऑफिस स्पेस और रियल एस्टेट सेक्टर को भी प्रभावित करेगी, जिससे वैश्विक आर्थिक क्रैश की शुरुआत हो सकती है। ऐसे माहौल में वे सलाह देते हैं कि लोग केवल नौकरी पर निर्भर न रहें और साइड इनकम, उद्यमिता तथा गोल्ड-सिल्वर जैसे वास्तविक संपत्तियों में निवेश कर अपनी आर्थिक सुरक्षा मजबूत करें।
Energy सेक्टर में करें इनवेस्ट – रॉबर्ट कियोसाकी

कियोसाकी के अनुसार ऊर्जा क्षेत्र आज के वैश्विक आर्थिक माहौल में सबसे स्थिर और रणनीतिक निवेश के विकल्पों में गिना जाता है। भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावटें और उत्पादन में उतार-चढ़ाव तेल–गैस की कीमतों को प्रभावित करते हैं, जिससे निवेशकों के लिए लगातार अवसर बनते हैं। साथ ही, ऊर्जा की मांग हर अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए यह सेक्टर लंबी अवधि में स्थिर माना जाता है।
आने वाले वर्षों में AI और आधुनिक तकनीकों की बढ़ती खपत ऊर्जा की मांग को और तेज करेगी, जिससे तेल, प्राकृतिक गैस और क्लीन एनर्जी कंपनियों में निवेश मजबूत रिटर्न दे सकता है। वे खुद ऑयल और गैस प्रोड्यूसर कंपनियों में निवेश करते हैं और सामान्य निवेशकों को स्टॉक्स, ETFs और म्यूचुअल फंड के जरिए इस सेक्टर में कदम रखने की सलाह देते हैं। स्वच्छ ऊर्जा का तेजी से विस्तार भी ऊर्जा निवेश को एक सुरक्षित और भविष्य-केंद्रित विकल्प बनाता है।
- भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया भर में बढ़ते तनाव से तेल और गैस की कीमतों पर असर
- मांग में कोई कमी नहीं: ऊर्जा की जरूरत लगातार बनी हुई है
- सप्लाई चेन में दबाव: उत्पादन और आपूर्ति में आ रही परेशानियां
- Clean Energy का उभार: नई तकनीक से लागत घट रही है, मुनाफा बढ़ रहा है
उनका कहना है, “जिस देश के पास ऊर्जा है, वही भविष्य की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेगा।”
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भारत के लोगों के लिए क्यों जरूरी है ?
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के साथ ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन चुनौतियों के कारण ऊर्जा सुरक्षा देश के लिए अहम मुद्दा बन चुकी है। भारत अभी भी कोयला, तेल और गैस के आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे विदेशी खर्च बढ़ता है। ऐसे में Robert Kiyosaki की ऊर्जा सेक्टर में निवेश की सलाह भारत के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्योंकि देश पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता देते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश न केवल आयात निर्भरता कम कर सकता है, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देता है। यही कारण है कि ऊर्जा सेक्टर भारत के लिए एक दीर्घकालिक, रणनीतिक और भविष्य-निर्धारक निवेश अवसर माना जा रहा है।




