भारत में ई-कॉमर्स का परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है। अब यह केवल कुछ बड़े प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं रह गया है। ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के ज़रिए देश के छोटे दुकानदार, MSMEs, कारीगर और स्थानीय व्यापारी भी सीधे ग्राहकों तक अपनी पहुँच बना पा रहे हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में कहा कि ONDC भारत में ई-कॉमर्स को लोकतांत्रिक बना रहा है और छोटे व्यापारियों को प्लेटफॉर्म आधारित एकाधिकार से मुक्त करने में सहायक साबित हो रहा है।
ONDC की अनूठी विशेषताएं
पारंपरिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे Amazon, Flipkart और Meesho से मौलिक रूप से भिन्न है। जहाँ बड़े प्लेटफॉर्म्स एक बंद इकोसिस्टम में काम करते हैं, वहीं ONDC एक खुला और परस्पर संचालित नेटवर्क है।
ONDC के प्रमुख लाभ:
- स्वतंत्रता: विक्रेता किसी एक ऐप या प्लेटफॉर्म से बंधे नहीं रहते।
- व्यापक पहुंच: एक विक्रेता कई buyer apps पर एक साथ दिखाई दे सकता है।
- निष्पक्ष नियम: शर्तें और कमीशन किसी एक कंपनी के नियंत्रण में नहीं होते।
पीयूष गोयल के अनुसार, ONDC का मूल उद्देश्य छोटे व्यापारियों को समान अवसर प्रदान करना है, ताकि वे भी डिजिटल कॉमर्स में बराबरी से भागीदारी कर सकें।
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छोटे व्यापारियों के लिए गेम-चेंजर
ONDC के माध्यम से माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे बिना भारी कमीशन दिए देशभर के ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं। पारंपरिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जहाँ 15-30% तक कमीशन लेते हैं, वहीं ONDC इस बोझ को काफी हद तक कम करता है।
छोटे शहरों और कस्बों के व्यापारियों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक साबित हो रहा है, जहाँ बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की पहुंच अभी भी सीमित है। अब एक मुज़फ़्फ़रपुर का दुकानदार या पटना की गृहिणी द्वारा तैयार किए गए उत्पाद मुंबई या दिल्ली के ग्राहकों तक सीधे पहुंच सकते हैं।
तेज़ी से बढ़ता नेटवर्क
सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़े ONDC की सफलता की कहानी बयान करते हैं। 9 दिसंबर 2025 तक 1.16 लाख से अधिक विक्रेता इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, जो 630 से अधिक शहरों और कस्बों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें फूड, ग्रोसरी, फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य रिटेल कैटेगरी शामिल हैं।
नेटवर्क में 85 से अधिक buyer participants और 187 से अधिक seller participants की मौजूदगी यह दर्शाती है कि ONDC महज एक सरकारी प्रयोग नहीं, बल्कि एक जीवंत और तेज़ी से विकसित होता हुआ डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है।
डिजिटल पहचान का सशक्तिकरण
ONDC का इंटरऑपरेबल QR कोड सिस्टम स्थानीय दुकानदारों के लिए क्रांतिकारी साबित हो रहा है। किराना स्टोर, कारीगर, MSMEs और लोकल रिटेलर्स को अब कम लागत में डिजिटल पहचान मिल रही है। एक बार QR कोड जनरेट करने के बाद, उनका बिज़नेस सभी ONDC-सपोर्टेड ऐप्स पर UPI की तरह दिखाई देने लगता है, जिससे ग्राहक उन्हें आसानी से खोज सकते हैं।
यह तकनीक खासकर उन छोटे व्यापारियों के लिए वरदान है जो वेबसाइट बनाने या महंगे डिजिटल मार्केटिंग में निवेश नहीं कर सकते।
TEAM योजना: MSME सशक्तिकरण का माध्यम
MSME मंत्रालय की Trade Enablement and Marketing (TEAM) योजना ONDC को और भी मजबूत बना रही है। यह योजना डिजिटल साक्षरता पर ज़ोर देती है और छोटे व्यापारियों की onboarding, प्रोडक्ट cataloging में सहायता प्रदान करती है।
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस योजना में 50% लाभार्थी महिला-नेतृत्व वाले व्यापार हैं। यह महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आर्थिक समावेशन को भी बढ़ावा देता है। स्वयं सहायता समूह (SHGs), Farmer Producer Organizations (FPOs), कारीगर और ग्रामीण उद्यमी भी इस पहल से लाभान्वित हो रहे हैं।
फिनटेक एकीकरण: क्रेडिट तक सीधी पहुंच
ONDC की दूरदर्शिता इस बात में भी दिखती है कि यह केवल ई-कॉमर्स तक सीमित नहीं है। सरकार इसे डिजिटल फाइनेंस से भी जोड़ रही है। वर्तमान में ONDC नेटवर्क पर पर्सनल लोन और गोल्ड लोन जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं, जिसमें 10 से अधिक बैंक, NBFCs और loan service providers शामिल हैं।
भविष्य में MSMEs को सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म से वर्किंग कैपिटल और बिज़नेस लोन मिलने की संभावना है। यह एकीकरण छोटे व्यापारियों के लिए वित्तीय बाधाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बिहार के लिए सुनहरा अवसर
बिहार जैसे राज्यों के लिए ONDC एक परिवर्तनकारी अवसर प्रस्तुत करता है। राज्य में हज़ारों छोटे व्यापारी, स्थानीय स्टार्टअप, किराना और होम-बेस्ड बिज़नेस हैं जो अब राष्ट्रीय बाजार से सीधे जुड़ सकते हैं।
मधुबनी की पेंटिंग हो या मिथिला की हस्तशिल्प कला, मखाना उत्पादन हो या स्थानीय खाद्य उत्पाद, सभी को अब पूरे भारत में ग्राहक मिल सकते हैं। यह मॉडल बिहार में स्टार्टअप, फिनटेक और डिजिटल MSME इकोसिस्टम को तेज़ी से विकसित कर सकता है और युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
ONDC भारत के डिजिटल कॉमर्स इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है। यह न केवल बड़े प्लेटफॉर्म्स के एकाधिकार को चुनौती दे रहा है, बल्कि लाखों छोटे व्यापारियों को डिजिटल भारत का सक्रिय हिस्सा बना रहा है।
पीयूष गोयल के अनुसार, आने वाले वर्षों में ONDC भारत में समावेशी, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ई-कॉमर्स सिस्टम की मजबूत नींव बनेगा। यह पहल न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि डिजिटल समानता और सामाजिक न्याय को भी बढ़ावा देगी।
जैसे-जैसे अधिक विक्रेता और buyers इस नेटवर्क से जुड़ेंगे, ONDC की शक्ति और प्रभाव बढ़ता जाएगा। यह भारत के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




