कैब सर्विस की बात आते ही अक्सर Ola, Uber और Rapido जैसे बड़े नाम सामने आते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये प्लेटफॉर्म अभी तक ग्रामीण रूट और लंबी दूरी की यात्रा के लिए पूरी तरह कारगर नहीं हो पाए हैं। इसी गैप को भरने के लिए आया है रैडवेज (RodBez), जो कि विशेष रूप से बिहार के गाँवों, कस्बों और छोटे शहरों की जरूरतों को समझकर बना एक स्थानीय स्टार्टअप है, Shark Tank India में आने के बाद यह स्टार्टअप अचानक से चर्चा का केंद्र बन गया है ।
Rodbez क्या है?
Rodbez एक वन-वे टैक्सी और टैक्सीपुल जैसी सेवा प्रदान करने वाला प्लैटफॉर्म है, जो बिहार में सस्ती और सुरक्षित यात्रा की सुविधा देता है। यह शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में टैक्सी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ ड्राइवरों के लिए आय के अवसर भी पैदा करता है। जिसे खास तौर पर छोटे और मिड-टियर शहरों की mobility needs को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों को कम कीमत में तेज, सुरक्षित और बिना-झंझट वाली राइड उपलब्ध कराना है।
Rodez की स्थापना की कहानी
रोड़बेज़ की स्थापना दिलखुश कुमार (Dilkhush Kumar) ने की, जो खुद बिहार के एक छोटे शहर से आते हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान महसूस किया कि बिहार और छोटे शहरों में यात्रा करना कितना मुश्किल है। स्थानीय परिवहन की सुविधाएं या तो बेहद महंगी थीं या फिर सुरक्षित नहीं थीं। यही समस्या उनके मन में एक विचार लेकर आई कि क्यों न एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए जो विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया हो।
दिलखुश ने अपनी टीम के साथ मिलकर गहन रिसर्च की और पाया कि बिहार में हजारों लोग रोजाना लोकल ट्रांसपोर्ट की समस्या से जूझते हैं। ऑटो रिक्शा, टैक्सी और अन्य साधनों में मीटर की व्यवस्था नहीं होने से यात्री अक्सर ठगे जाते हैं। इसी समस्या का समाधान बनकर रोड़बेज़ ने अपनी यात्रा शुरू की।
शार्क टैंक इंडिया में रोड़बेज़
रोड़बेज़ को राष्ट्रीय पहचान मिली जब यह स्टार्टअप शार्क टैंक इंडिया के मंच पर पहुंचा। दिलखुश कुमार और उनकी टीम ने शार्क्स के सामने अपना बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किया और बताया कि कैसे रोड़बेज़ बिहार और अन्य छोटे शहरों में मोबिलिटी की समस्या को हल कर रहा है। उनकी प्रेजेंटेशन में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में एक बड़ा बाजार मौजूद है जिसे अभी तक बड़ी कंपनियों ने नजरअंदाज किया है।
शार्क्स ने रोड़बेज़ के बिजनेस मॉडल, उसकी ग्राउंड लेवल रीच और सोशल इम्पैक्ट की सराहना की। हालांकि डील की बारीकियां अलग-अलग रहीं, लेकिन इस शो में आने के बाद रोड़बेज़ को व्यापक पहचान मिली और निवेशकों का ध्यान इस स्टार्टअप की ओर आकर्षित हुआ।
रोड़बेज़ का बिजनेस मॉडल और सेवाएं
रोड़बेज़ तीन मुख्य सेवाएं प्रदान करता है जो इसे अन्य मोबिलिटी प्लेटफॉर्म से अलग बनाती हैं। पहली सर्विस है लोकल राइड्स, जिसमें शहर के भीतर किफायती और सुरक्षित यात्रा की सुविधा दी जाती है। दूसरी सर्विस रेंटल है, जहां लोग अपनी जरूरत के हिसाब से घंटों या दिनों के लिए गाड़ी किराए पर ले सकते हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण सर्विस है इंटरसिटी ट्रैवल, जो छोटे शहरों को आपस में जोड़ती है।
रोड़बेज़ का बिजनेस मॉडल कमीशन बेस्ड है। ड्राइवर्स को प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करना होता है और हर राइड पर कंपनी एक निश्चित प्रतिशत कमीशन लेती है। साथ ही, रेंटल सर्विस में सीधे कंपनी की खुद की कुछ गाड़ियां भी हैं जो अच्छी आमदनी का जरिया बनती हैं। कंपनी का फोकस केवल मुनाफा कमाना नहीं बल्कि स्थानीय ड्राइवर्स को रोजगार देना और यात्रियों को सस्ती व सुरक्षित सेवा प्रदान करना भी है।
बिहार में लोकल मोबिलिटी की चुनौतियां
बिहार में लोकल ट्रांसपोर्ट की कई बुनियादी समस्याएं हैं।
- मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता : अधिकतर ऑटो और टैक्सी चालक मीटर का उपयोग नहीं करते और यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं।
- सुरक्षा की समस्या : विशेष रूप से महिलाओं और रात के समय यात्रा करने वाले लोगों के लिए सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय है।
- उपलब्धता की चुनौती : छोटे शहरों में ओला और उबर जैसी सेवाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या फिर बहुत सीमित हैं।
- इंटरसिटी ट्रैवल के विकल्पों : बसों के अनिश्चित समय और ट्रेनों की सीमित कनेक्टिविटी के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रोड़बेज़ ने इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखकर अपनी सेवाओं को डिजाइन किया है। ऐप-बेस्ड बुकिंग से किराए की पारदर्शिता आती है, ड्राइवर्स की पूरी वेरिफिकेशन से सुरक्षा मिलती है, और व्यापक नेटवर्क से उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
रोड़बेज़ का सोशल इम्पैक्ट
रोड़बेज़ केवल एक बिजनेस नहीं है बल्कि यह एक सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बन रहा है। इस प्लेटफॉर्म ने बिहार में सैकड़ों ड्राइवर्स को रोजगार दिया है। कई ड्राइवर्स जो पहले अनिश्चित आमदनी से जूझ रहे थे, अब नियमित राइड्स मिलने से उन्हें स्थिर आय मिल रही है। कंपनी ड्राइवर्स को ट्रेनिंग भी देती है जिससे वे बेहतर सर्विस प्रदान कर सकें।
महिलाओं के लिए रोड़बेज़ ने विशेष फीचर्स जोड़े हैं। महिला यात्री चाहें तो महिला ड्राइवर का विकल्प चुन सकती हैं। राइड ट्रैकिंग और इमरजेंसी बटन जैसे फीचर्स से सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, स्थानीय भाषा में ऐप उपलब्ध होने से गांव और छोटे शहरों के लोग भी आसानी से इसका उपयोग कर पा रहे हैं।
रोड़बेज़ ने छात्रों और बुजुर्गों के लिए विशेष डिस्काउंट स्कीम भी शुरू की है। इससे समाज के हर वर्ग को किफायती परिवहन की सुविधा मिल रही है। यह सामाजिक समावेशन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
तकनीकी नवाचार और ऐप फीचर्स
रोड़बेज़ का मोबाइल ऐप यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के साथ डिजाइन किया गया है। ऐप में एडवांस्ड GPS ट्रैकिंग है जो रियल-टाइम में गाड़ी की लोकेशन दिखाती है। पेमेंट के लिए कैश, यूपीआई, कार्ड और वॉलेट सभी ऑप्शन उपलब्ध हैं। राइड शेड्यूलिंग की सुविधा से यात्री पहले से अपनी राइड बुक कर सकते हैं।
ऐप में रेटिंग और फीडबैक सिस्टम है जो सर्विस क्वालिटी बनाए रखने में मदद करता है। कम रेटिंग पाने वाले ड्राइवर्स की काउंसलिंग की जाती है या उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाता है। इससे हमेशा अच्छी सर्विस मिलती रहती है।
रोड़बेज़ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया है। ऐप डिमांड पैटर्न को एनालाइज करके ड्राइवर्स को सही समय और जगह पर राइड्स उपलब्ध कराने में मदद करता है। डायनामिक प्राइसिंग भी लागू की गई है जो डिमांड और सप्लाई के हिसाब से किराए को एडजस्ट करती है, लेकिन यह हमेशा उचित सीमा में रहती है।
प्रतिस्पर्धा और बाजार में स्थिति
मोबिलिटी सेक्टर में ओला, उबर और रैपिडो जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं। लेकिन रोड़बेज़ का यूनिक सेलिंग प्रपोजिशन यह है कि यह विशेष रूप से टियर 2 और टियर 3 शहरों पर फोकस करता है जहां बड़ी कंपनियां अभी तक सही से नहीं पहुंच पाई हैं। रोड़बेज़ की लोकल अंडरस्टैंडिंग, किफायती किराए और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच इसे अलग बनाती है।
रोड़बेज़ ने बड़ी कंपनियों से सीधे मुकाबला करने की जगह अपना एक अलग मार्केट चुना है। यह रणनीति सही साबित हो रही है क्योंकि छोटे शहरों में कंपनी को तेजी से विकास हो रहा है। लोग रोड़बेज़ को एक ऐसा प्लेटफॉर्म मानते हैं जो उनकी जरूरतों को समझता है।
कंपनी ने स्थानीय ऑटो यूनियनों और ड्राइवर एसोसिएशन के साथ भी अच्छे संबंध बनाए हैं। इससे ग्राउंड लेवल पर कोई विरोध नहीं होता और ड्राइवर्स खुशी से प्लेटफॉर्म से जुड़ते हैं।
विस्तार योजना और भविष्य का विजन
रोड़बेज़ बिहार के कई प्रमुख शहरों में चल रहा है। कंपनी की योजना है कि अगले दो सालों में झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के छोटे शहरों में भी अपनी सेवाएं शुरू करने की। दिलखुश कुमार का विजन है कि रोड़बेज़ पूरे पूर्वी और उत्तरी भारत के छोटे शहरों में मोबिलिटी का पहला विकल्प बने।
कंपनी नई सर्विसेज भी जोड़ने की योजना बना रही है। डिलीवरी सर्विस, बाइक टैक्सी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को फ्लीट में शामिल करना प्रमुख योजनाओं में है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स से न केवल ऑपरेशनल कॉस्ट कम होगी बल्कि पर्यावरण को भी फायदा होगा।
रोड़बेज़ फ्रेंचाइजी मॉडल पर भी काम कर रहा है। इससे स्थानीय उद्यमी रोड़बेज़ के साथ जुड़कर अपने शहर में सर्विस शुरू कर सकेंगे। यह मॉडल तेजी से विस्तार में मदद करेगा और स्थानीय रोजगार भी बढ़ाएगा।
दिलखुश कुमार की यात्रा
दिलखुश कुमार की कहानी किसी भी युवा उद्यमी के लिए प्रेरणादायक है। एक साधारण परिवार से आकर उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय से यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान ही उद्यमिता में रुचि दिखाई और छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम करना शुरू किया।

रोड़बेज़ शुरू करने से पहले दिलखुश ने कई महीनों तक फील्ड रिसर्च की। वे खुद ऑटो और टैक्सी में यात्रा करते थे, ड्राइवर्स से बात करते थे और यात्रियों की समस्याएं समझते थे। इस ग्राउंड वर्क ने उन्हें एक मजबूत बिजनेस मॉडल बनाने में मदद की।
शुरुआती दिनों में फंडिंग की कमी एक बड़ी चुनौती थी। दिलखुश ने अपनी बचत और परिवार की मदद से प्रोटोटाइप बनाया। धीरे-धीरे एंजेल इन्वेस्टर्स का ध्यान आकर्षित हुआ और फंडिंग मिलनी शुरू हुई। शार्क टैंक में जाने से पहले ही रोड़बेज़ ने अपनी विश्वसनीयता साबित कर दी थी।
दिलखुश का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। उनकी सलाह युवा उद्यमियों को यह है कि वे अपनी समस्याओं को अवसर में बदलें, ग्राउंड रिसर्च पर फोकस करें और धैर्य रखें।
ग्राहकों की प्रतिक्रिया और सफलता की कहानियां
रोड़बेज़ के यूजर्स से मिली प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है। पटना की एक कॉलेज स्टूडेंट ने बताया कि रोड़बेज़ से उन्हें रात में भी सुरक्षित घर लौटने की सुविधा मिलती है। एक बिजनेसमैन ने शेयर किया कि इंटरसिटी ट्रैवल सर्विस से उनका समय और पैसा दोनों बचता है।
ड्राइवर्स भी काफी खुश हैं। एक ड्राइवर ने बताया कि रोड़बेज़ से जुड़ने के बाद उनकी मासिक आय दोगुनी हो गई है। पहले उन्हें सड़क पर खड़े होकर सवारी का इंतजार करना पड़ता था, अब ऐप के जरिए नियमित राइड्स मिलती रहती हैं।
सोशल मीडिया पर भी रोड़बेज़ को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। कई यूजर्स ने अपने पॉजिटिव एक्सपीरियंस शेयर किए हैं। कंपनी की कस्टमर सपोर्ट टीम भी सक्रिय है और किसी भी समस्या का जल्दी समाधान करती है।
चुनौतियां और सीख
हर स्टार्टअप की तरह रोड़बेज़ को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। शुरुआत में ड्राइवर्स को प्लेटफॉर्म पर लाना मुश्किल था क्योंकि उन्हें टेक्नोलॉजी का डर था। कंपनी ने इसके लिए विशेष ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए और हिंदी में सपोर्ट दिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी एक बाधा रही। छोटे शहरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी अक्सर कमजोर होती है। रोड़बेज़ ने अपने ऐप को ऐसे डिजाइन किया कि वह लो बैंडविड्थ में भी काम कर सके। ऑफलाइन मोड जैसे फीचर्स जोड़े गए।
प्रतिस्पर्धा से निपटना भी चुनौतीपूर्ण रहा। बड़ी कंपनियां कभी-कभी अग्रेसिव प्राइसिंग करती हैं। लेकिन रोड़बेज़ ने क्वालिटी सर्विस और लोकल टच से अपनी अलग पहचान बनाई है।
इन चुनौतियों से टीम ने बहुत कुछ सीखा। सबसे बड़ी सीख यह रही कि कस्टमर्स और ड्राइवर्स दोनों की जरूरतों को समझना जरूरी है। लचीलापन और एडैप्टेबिलिटी सफलता की कुंजी है।
बिहार के स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान
रोड़बेज़ की सफलता ने बिहार के पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक नई दिशा दी है। यह साबित हुआ है कि बिहार से भी वर्ल्ड क्लास स्टार्टअप खड़े हो सकते हैं। दिलखुश कुमार अब नियमित रूप से कॉलेजों और इनक्यूबेशन सेंटर्स में जाकर युवाओं को गाइड करते हैं।
रोड़बेज़ ने स्थानीय इकोसिस्टम में निवेश को भी आकर्षित किया है। जब इन्वेस्टर्स ने रोड़बेज़ की सफलता देखी तो उन्हें बिहार के अन्य स्टार्टअप्स में भी रुचि होने लगी। इससे पूरे राज्य को फायदा हुआ है।
सरकार भी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पॉलिसीज ला रही है। बिहार स्टार्टअप पॉलिसी के तहत युवा उद्यमियों को कई सुविधाएं मिल रही हैं। रोड़बेज़ इस पॉलिसी के सफल कार्यान्वयन का एक उदाहरण है।




